राजनीति
राजनीति बहुत सारे चेहरे हैं कुछ मुस्कुरा रहे हैं कुछ चिल्ला रहे हैं कुछ भोले से दिख रहे हैं ... कुछ चेहरों मे छिपा लोभ है कुछ चेहरों में ठेकेदारी है कुछ तो धर्म के पूरक हैं ... काटते , छांटते और बांटते आदमी चिल्लाते हैं वोट दो… . पानी लो , बिजली लो , विकास लो ,,, मैं ट्रेन दूँगा , मैं रोड दूँगा , मैं राष्ट्र दूँगा , मैं संस्कृति दूँगा ,, मैं विश्व गुरु का गौरव लाऊँगा ,, मैं मंदिर बनाऊंगा ,,, मैं मस्जिद बनवाऊंगा ,, मैं सीमाएं सुदृढ़ करूँगा ,, मैं नौकरियाँ दूंगा ,,, मैं लैपटॉप दूंगा ,,,, मै भ्रष्टाचार मिटाऊंगा ,,, मैं नक्सल खत्म करूंगा ,, मैं आतंकवाद मिटाऊंगा ... इतने सारे नारे हैं ,,,, पर कोई यह नहीं कह रहा .... मैं आदमी बचाऊंगा ...... इस शोर में दब चुका है रुदन और मूक मृत्यु विदर्भ , मराठवाडा के किसानों की ..... कौन करे परवाह ,, आधा भारत कुछ महीनों बाद भूखा मरेगा ... लेकिन वक़्त कहाँ है विदीर्ण करते मौसम की खामोश आहट सुनने का ... अभी तो चुनावों से भ...