मेरी िजदंगी के कुछ अनजान लमहों ने पूछा हमें पहचानते हो ? मुझे लगा शायद ये मजाक है ! मेरा सवाल ओेर मेरा ही जवाब ? बचपन के िखलोैने या अाज ठहरती सांसे कुछ भी तो नही भूला ! स्कूल मे झूमते वो दो िवशाल बरगद घर से कुछ दूर था जंगल स्टोर थोड़ा फासले पर तालाब भी ........ हुआ करते थे ! सब दाँव पर लगा िदया ..... मेरे मािलक ! िवकास एक जरूरत थी ,,, दूसरे मुल्क तरक्की कर रहे थे ? लेिकन हम जंगलों में जी रहे थे अस्भ्य ओैर अपृत्यािशत जीवन !! मैने खुद को बदला ...... सोंच को बदला ........ ओैर खड़ा िकया ....... इमारतों , पुलों का िनजाम ...... कारों , जहाजों , मोबाइलों ओैर दवाओं का न िसमटने वाला दोैर ले अाया !! सीने को हाथों से दबाए चंद सांसों को थामता केैंसर ओैर एड्स से ...
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