Thursday, March 9, 2023
Sunday, February 27, 2022
यूक्रेन
वो चहचहाती सुबह होगी.
नारंगी आसमान में भीनी सी ताज़ी सुगंध तैर रही होगी.
बच्चे कुनमुनाने से जगाए जा रहे होंगे,
प्रेयसी प्रियतमों को चुम्बन से जगा रही होंगी ।
वो भोर एक दिन और जिंदगी को आगे ले जाने आयी होगी...
सब तरफ खिलखिलाते चेहरे मंगल गीत गा रहे होंगे।।।
बेखबर से ।।।।
उस काल चक्र से बेखबर,,
जो हमारी क्रूर नियति को छिपा कर ला रहा होगा।।।।
फिर कुछ जहाज़ चल पड़े होंगे
हिरोशिमा और नागासाकी लेकर
लेकर लाखों इंसानों के चिथड़े...
लेकर महलों की राख....
लेकर करोड़ों दरकते सपने...
लेकर बियाबां मौत का सन्नाटा।।।।।
हाँ सच में
मानवता की दुहाई देते
वो चरम राष्ट्र
फिर एक खूनी खेल खेलेंगे
फिर हथियारों की श्रेष्ठता सिद्ध करने आ रहे होंगे ।।।।।
कौन कितने मार सकता है
ये सवाल राक्षसों और देवताओं के युध्द से
हम तुच्छ इंसान भी गिनने बैठेंगे ।।।।।।
हम उस अभागी पीढ़ी के वाहक हो जाएंगे
जिसने उत्कृष्ट मानव को सृष्टि का संहार करते देखा ।।।।।।
कोरोना, हिग्स बोसोन, वर्चुअल एहसासों को
हाइड्रोजन सूरजों से भाप बनते देखा।।।।।।
वन क्रांति - जन क्रांति
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Sunday, April 18, 2021
Monday, May 11, 2020
Friday, April 17, 2020
Monday, March 30, 2020
Sunday, March 10, 2019
Thursday, February 14, 2019
आतंक
तुम लोगों के लिए।
एक नई दुनिया की ओर तुम्हारे कदम बढ़ रहे है.
नई मूछें, नई दाढ़ी
नए जेहाद के सपने
कुछ नया खून जो उबाल खा रहा है।।।
विद्रोह को तत्पर, बंदूक और बमों से भरी तुम्हारी तस्वीरें।।।
अपनी मां की कोख को बदनाम करते तुम
किसके सपनो के लिए मौत मांग रहे हो?????
कौन है जो कश्मीर की जिंदगी नही चाहता????
ढूंढ सकते हो??????
तुम्हारी लाशों में हिस्सेदारी की महिमा गाते
ये नफरत भरे चेहरे ।।।।
तुमको क्या दे रहे हैं????
एक टूटा कश्मीर, खून से सना कश्मीर।।।।
बूढ़ों का कश्मीर, रोती माँओं का कश्मीर।।।।।।।
प्रेयसी और बच्चों के सुख से मरहूम
अकाल मौत के भोगियों....
सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों
किलकिलाते बचपन के हत्यारों।।।।।।।
कभी सोंचा है कि इसका अंजाम क्या है।।।।।।
तुमने किसको मारा?????
तुमने कश्मीरियों के अरमानों को मारा।।।।।
तुमने मां बाप के परिवारों को मारा।।।।
तुमने सड़कों को मारा
तुमने अस्पतालों को मारा
तुमने पढ़ने जाने वाले नौनिहालों को मारा
तुमने अनाज को मारा, तुमने पानी को मारा
तुमने भारत के विश्वास को मारा।।।।
तुमने एक माला में गुंथे,,
इंसानियत के सपने को मारा।।।।।
तुमने कभी सोंचा है भारत क्या है?
तुम्हारे और हमारे पुरखों की धरती को
किसके कहने पर ख़ूनी कर दिया????
अपने खून को बहा कर, खुशी मनाने वालों
कैसे निर्दयी हो चुके हो?????
बस ज्यादा क्या लिखूँ
लीबिया, इराक़, सीरिया, मिस्र, अफगानिस्तान और पाकिस्तान
की राह पर जाने वालों......
दोझख के उम्मीदवारों......
क्या सच में तुम अपनी जड़ों को उखाड़ने वाले.....
वही अमानव हो ??????
जिसके लिए हमारा क्षत विक्षत भविष्य सवाली है.......
राम सिंह यादव
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Sunday, July 29, 2018
Wednesday, December 20, 2017
दुधवा लाइव: आखिरकार.. मानव जंगलों में भागकर अपनी जान बचा रहा ...
Sunday, September 17, 2017
Wednesday, September 2, 2015
Wednesday, March 18, 2015
परमाणु विभीषिका का महासंकट और गाय · गंगा · गांव — राम सिंह यादव ★ ★ ★ परमाणु विभीषिका का महासंकट और गाय · ...
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लगभग हर युग में इंसान अपने भगवान बनाता रहा.... कल्पनाओं में बनी स्वर्ग-नर्क, देवता-राक्षस, धर्म-अधर्म की गाथाएं सुनाता रहा!!!!!!!! सबके भगव...
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मेरी िजदंगी के कुछ अनजान लमहों ने पूछा हमें पहचानते हो ? मुझे लगा शायद ये मजाक है ! मेरा सवाल ओेर मेरा ह...
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परमाणु विभीषिका का महासंकट और गाय · गंगा · गांव — राम सिंह यादव ★ ★ ★ परमाणु विभीषिका का महासंकट और गाय · ...






















































